चौपाल नीता की ...

Tuesday, 1 June 2021

बड़ा मंगल

 


संकट कटै मिटै सब पीरा।

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।


अवध में ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगलवार को बड़ा मंगल कहा जाता है जिसमें हनुमान जी का विशेष पूजन-अर्चन होता है। जगह-जगह भण्डारे होते हैं।


इतिहासकारों के अनुसार बड़े मंगल को मनाए जाने का इतिहास लगभग 400 वर्ष पुराना है। 


बड़े मंगल के साथ लखनऊ के अलीगंज में स्थित हनुमान जी का मंदिर जुड़ा हुआ है। यह सबसे प्राचीन मंदिर है और इसकी बड़ी मान्यता है।



बताते हैं कि सन् 1798 में अवध के नवाब थे सहादत अली खान। संतान की लालसा पूरी नहीं हुई थी। उनकी माँ आलिया बेगम ने मन्नत माँगी। नवाब की बेगम ने पुत्र को जन्म दिया। आलिया बेगम की मुराद पूरी हुई। आलिया बेगम को ख़्वाब में हनुमान जी के दर्शन हुए।उन्होंने बेगम साहिबा को निशान लगे स्थान पर खुदाई करवा कर अपनी मूर्ति निकलवाने का आदेश दिया। बेगम साहिबा ने खुदाई प्रारम्भ करवाई। जनता उनका मजाक उड़ाने लगी। बेगम साहिबा विचलित हुए बिना हनुमान जी से उस स्थल को दिखाने की प्रार्थना करने लगीं।


उन्होंने हनुमान जी से विनती की कि, “ आपके आदेश पर जमीन की खुदाई प्रारम्भ करवाई है। कृपया अपना दर्शन दें। ” हनुमान जी मूर्ति ने दर्शन दिया। जनता जय हनुमान के नारे लगाने लगी। 


आलिया बेगम ने हाथी मंगवा कर उसकी पीठ पर हनुमान जी की मूर्ति को स्थापित किया और उसे आजाद करवा कर कारिंदों को आदेश दिया कि, “ हाथी के पीछे जाओ। जहाँ भी जा कर हाथी अपने आप रूक जाए बस  ठीक वहीं हनुमान जी का मन्दिर बनना प्रारम्भ किया जाए। हनुमान जी स्वयं अपने मन्दिर की स्थापना की जगह तय करेंगें। ” हाथी अलीगंज में जा कर रुक गया। हनुमान जी ने अपना स्थल चुन लिया था।आलिया बेगम ने वहीं पर हनुमान जी के मन्दिर का निर्माण करवाकर मूर्ति की स्थापना की। मन्दिर के गुम्बद पर एक सितारा और एक अर्धचंद्र बनाया गया जो हिन्दू मुस्लिम एकता व भाईचारे को दर्शाता है।



अवध के आख़िरी नवाब वाज़िद अली शाह ने मंदिर में पूजा अर्चना और भोज-भण्डारे की परंपरा को सजीव रखा।


एक कथा और प्रचलित है। अवध के नवाब हुए मोहम्मद अली शाह। उनके पुत्र की तबियत खराब थी जो दिनों दिन बिगड़ती ही जा रही थी। किसी भी हक़ीम वैद्य का इलाज़ माफ़िक ही नहीं आ रहा था। ऐसे में किसी ने बालक को अलीगंज स्थित हनुमान जी के मंदिर में दर्शन करवाने ले जाने का सुझाव दिया। नवाब और उनकी बेगम रुबिया बच्चे को मन्दिर ले गए। मन्दिर के पुजारी ने उनसे राजकुमार को मन्दिर में छोड़कर जाने के लिए कहा और कुछ दिन बाद का समय दिया पुनः आकर पुत्र को ले जाने का आदेश दिया। नियत समय पर नवाब और बेगम अपने पुत्र को लेने पहुँचे। अपने स्वस्थ पुत्र को देखकर वे हनुमान जी के चमत्कार के आगे नतमस्तक हुए। नवाब साहब ने मन्दिर के सौंदर्यीकरण के लिए अनेक कार्य करवाये और  ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगल पर बड़ा मंगल मनाए जाने की घोषणा की। हनुमान जी की सम्पूर्ण विधि विधान से पूजा हुई। भण्डारा हुआ। उसी समय से बड़ा मंगल पर्व मनाया जाने लगा।


तब से आज तक ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगल को बड़ा मंगल मनाया जाता है। बहुत बड़ा मेला लगता है। सम्पूर्ण शहर में भण्डारे होते हैं। जगह-जगह प्याऊ लगाए जाते हैं जिसमें पानी और शर्बत श्रद्धालुओं को पिलाया जाता है।



The Legend: Sachin Tendulkar

Over the years, Tendulkar has forged his name in history as the ‘The Greatest Batter of all time’ and he also got nicknamed as The ‘Master B...