चौपाल नीता की ...

Monday, 15 November 2021

The Legend: Sachin Tendulkar

Over the years, Tendulkar has forged his name in history as the ‘The Greatest Batter of all time’ and he also got nicknamed as The ‘Master Blaster’.

The Tendulkar bid adieu to international cricket in 2013 and to date, he remains the highest run-scorer in both Tests and ODIs. Sachin Tendulkar also has a record for registering most international centuries.


Sachin Tendulkar long carried a nation's cricketing hopes on his shoulders. But in 2011, at his last World Cup on home soil, his teammates returned the favour. Fans voted it the sporting moment of the century so far.


Former Indian batsman Sachin Tendulkar won a special award at the Laureus ceremonies in Berlin on Monday, a rare cricketing honour being handed out in Germany, where the sport's following is modest.

Tendulkar, who holds the record for the highest run-scorer of all time in international cricket, won a fan vote for the award for the Best Sporting Moment from the last two decades. The Laureus ceremony described the scene, “As Tendulkar's teammates took him around the pitch for a victory lap, as the Indian cricketer being carried on the shoulders of a nation.”

Sachin Tendulkar said on receiving the award in Berlin, "It's incredible. The feeling of winning the world cup was beyond what words can express. How many times you get an event happening where there are no mixed opinions. Very rarely the entire country celebrates.”

The thought of not watching Tendulkar on a cricket field became a reality and the thousand n thousand in the stands shed tears as the Master Blaster delivered an emotional farewell speech during the presentation ceremony.

Sachin Tendulkar was walking to the ground, he was met with huge applause since everybody knew how big a moment it was. Everyone wants to salute him in their own way. They were shouting, screaming and was filled with emotions.
It was a moment of pride. Sachin Tendulkar did entertain the huge crowd by rolling his arms.

On November 16, 2013, Wankhede Stadium, Mumbai witnessed Sachin Tendulkar was walking out of the cricket field for the final time as an international cricketer. The entire stadium erupted in applause, thanking him for his service. 

My Facebook post for which I recorded video directly from television on my mobile...

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=455764387878069&id=100003335344155



Sachin Tendulkar’s wife & children were also present on the ground to honour him.

The Washington Post stated, “ Sachin Tendulkar, India’s ‘ God of Cricket ’, retires.”

Sunil Gavaskar, who was commentating on that day, said on air loudly & emotionally:  “ What an innings from the Master, Thanks for the entertainment for 24 years. It would have been fantastic had it been a hundred. Sachin Ramesh Tendulkar, thank you, thank you, thank you.”

Have a look...
https://twitter.com/BCCI/status/1460098286484746243?s=20

You are Pride of India 🇮🇳  
We salute you 
The Sachin Tendulkar 






Pictures & video courtesy: Google & YouTube along with my Facebook post 


 


Tuesday, 17 August 2021

अफगानिस्तान या तालिबान : एक नज़रिया

 इराक के बाद अफगानिस्तान में सुपरपॉवर अमेरिका के लिए साबित हो गया कि अमेरिका विद्रोह से नहीं जीत पाता है। 

बाइडेन के कार्यकाल का ब्लंडर उनके राजनीतिक करियर पर सबसे बड़ा धब्बा बन गया।

अफगानिस्तान की वर्तमान स्थिति को एक ताकतवर लोकतंत्र की कट्टर धार्मिक संगठन के हाथों हार के रूप में देखा जाएगा।

जिस अफगान सेना को हजारों करोड़ों डॉलर के हथियारों और ट्रेनिंग से खड़ा करने का दावा किया गया था, वो तालिबान के सामने धराशायी हो गई। टक्कर देना तो दूर की बात है, कई जगहों पर तो सेना लड़ी तक नहीं।

नैरेटिव तो ये है कि एक गरीब देश के गुरिल्ला लड़ाकों  ने बिना किसी एयर सपोर्ट व आर्टिलरी के अमेरिकी सुपरपावर को शिकस्त दे दी।

अफगानिस्तान में 20 साल बिताने के बाद जब अमेरिका ने वापसी की तो साथ-साथ तालिबान का कब्जा हो गया।

सुपरपॉवर अमेरिका ने 20 वर्षों तक अफगानिस्तान में सिवाय बदनामी के कुछ नहीं हासिल किया। अगर अफगानिस्तान फिर से अल-कायदा, ISIS जैसे आतंकी संगठनों का पनाह देने वाला बनता है तो अमेरिका के 2 लाख करोड़ डॉलर जो उसने अफगानिस्तान में टैक्सपेयर्स के उड़ा दिए वे ही उसकी विश्वसनीयता और सम्मान पर सबसे बड़ा प्रश्नचिन्ह बनकर उठ खड़ा होगा।

पूरे शहर में अफरा-तफरी का माहौल बना दिया गया।देश से निकलने के लिए काबुल एयरपोर्ट पर लोगों की भीड़ लग गयी।

बाइडेन और अमेरिकी सरकार भले ही इसके जिम्मेदार अशरफ गनी, अफगान सेना, ट्रंप और तालिबान के बीच हुई दोहा डील को ठहरायें लेकिन इससे ये हकीकत नहीं बदलेगी कि बाइडेन के कार्यकाल की यह सबसे बड़ी गलती है। इतिहास उनके ब्लंडर को सदैव याद रखेगा।

संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान के प्रतिनिधि, गुलाम एम इसाकजई ने कहा, "आज मैं अफगानिस्तान के लाखों लोगों की ओर से बोल रहा हूँ। मैं उन लाखों अफगान लड़कियों और महिलाओं की बात कर रहा हूँ, जो स्कूल जाने और राजनीतिक-आर्थिक और सामाजिक जीवन में भाग लेने की अपनी आजादी खोने वाली हैं। तालिबान दोहा और दूसरे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने बयानों में किए गए वादों और प्रतिबद्धताओं का सम्मान नहीं कर रहा है। अफगानिस्तान के लोग डर में जी रहे हैं।"

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव, एंटोनियो गुटेरेस ने अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि , " दुनिया देख रही है और हमें अफगानिस्तान के लोगों को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। मैं सभी पार्टियों को मानवीय मदद देने की अपील करता हूँ। मैं सभी देशों से अपील करता हूँ कि वो शरणार्थियों को स्वीकार करें और डिपोर्टेशन से बचें। मैं तालिबान और सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और सभी व्यक्तियों के अधिकारों और स्वतंत्रता का सम्मान करने और उनकी रक्षा करने की अपील करता हूँ।अफगानिस्तान की महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ बढ़ते मानवाधिकारों के उल्लंघन से चिंतित हूँ, जो काले दिनों की वापसी से डर में हैं।”

तालिबान के पॉलिटिकल ऑफिस के प्रवक्ता मोहम्मद नईम ने अल जजीरा से कहा है , “ युद्ध अब खत्म हो चुका है और अफगानिस्तान में अब 'समावेशी इस्लामिक सरकार' बनाई जाएगी। अफगानिस्तान में नई सरकार का 'प्रकार और स्वरुप' क्या होगा, यह जल्दी साफ कर दिया जाएगा। तालिबान पूरी दुनिया से कटा हुआ नहीं रहना चाहता है और हम शांतिपूर्ण अंतरराष्ट्रीय रिश्ते चाहते हैं। ”

अब तालिबान के 90 के दशक का चेहरा फिर से याद करना होगा।  तालिबान और उनकी मानसिकता को जानने समझने के लिए उसके शासन काल के चरित्र को समझना होगा। 

तालिबान ने 1996 में काबुल पर कब्जा करके दुनिया की सबसे दमनकारी सरकार का शासन चलाया था। 1996 से लेकर 2001 में अमेरिका के हमले तक तालिबान ने अफगानिस्तान पर शासन किया था। 

शरिया कानून को उसने सबसे सख्त रूप में लागू किया था। लोगों की सार्वजानिक तौर पर हत्या, पत्थर मारना और कोड़े मारना आम था। तालिबान की पुलिस सही साइज की दाढ़ी न रखने वाले पुरुषों, टखना दिखाने वाले कपड़े पहनने वाले को मारा-पीटा करती थी। स्त्रियों के लिए वो दौर भयानक था। वो मर्दों की बिना लिखित इजाजत के बाहर नहीं जा सकती थीं और उन्हें बुर्का पहनना पड़ता था। लड़कियों को स्कूली शिक्षा प्राप्त करने तक पर रोक लगा दी गई थी।

तालिबान ने अपने उदारवादी नए स्वरूप को दुनिया के समक्ष लाने के लिए हाल में कई ऐसे बयान जारी किए हैं, जिसमें वो अपनी छवि एक नए और उदार संगठन की पेश करता नज़र आ रहा है। 

● उसने अमेरिकी और नाटो सेनाओं के साथ काम कर चुके या काबुल शासन के अधिकारियों की रक्षा करने का भी आश्वासन दिया है।

● वह किसी की भी निजी संपत्ति को हड़पने के पक्ष में नहीं है। उसने अफगानिस्तान के लोगों और उनकी संपत्तियों की सुरक्षा को अपनी प्रमुख जिम्मेदारी बताया है।

● उसके अनुसार उसके नियंत्रण वाले इलाकों में लोग शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सामान्य जिंदगी जी सकेंगे।

● राजनयिकों, दूतावासों, कॉन्सुलेट और चैरिटेबल वर्कर्स को आश्वासन दिया गया है कि उनके लिए एक सुरक्षित माहौल बनाया जाएगा।

तालिबान प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने बीबीसी से बातचीत में कहा था, "हम महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करते हैं। हमारी नीति है कि महिलाओं को शिक्षा और काम तक पहुंच दी जाए।”

तालिबान के बयानों पर भरोसा करना बहुत कठिन है क्योंकि हाल की कई घटनाएं उसके कथनी और करनी के फर्क को उजागर करती हैं।

इसे प्रमाणित करते हुए सायरा करीमी जो सरकार द्वारा संचालित फिल्म निर्माण कंपनी की महानिदेशक हैं,  ने अपने ट्वीट में बताया है कि,  “ कुछ हफ्तों में ही तालिबान ने कई स्कूलों को नष्ट कर दिया है और अब 20 लाख लड़कियों को स्कूल से बाहर कर दिया गया है। ”

हमें भारतीय फोटोजर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी की मौत अभी भूली नहीं है। दानिश सिद्दीकी स्पिन बोल्डक क्षेत्र में मार दिये गए थे जिसमें तालिबान ने हत्या में हाथ होने से इनकार किया था किन्तु मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि दानिश की क्रूर हत्या हुई है। जिस पर यथाचरित्र तालिबान ने भी अपना बयान पलटा और नया बयान जारी किया कि, “ दानिश सिद्दीकी बिना इजाजत इलाके में आए थे, इसलिए मारे गए। ”

तालिबान पर भरोसा करने के लिए उनके इतिहास के पन्नों को खोलना और दोहराना होगा। तब कहीं जाकर अपने भरोसे को तराजू पर रखना होगा।

Saturday, 7 August 2021

A Home away from home

 




A Home away from Home 

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पहले मुझे लगता था अपनों द्वारा उपेक्षित और ठुकराये इंसानों के लिए वृद्धाश्रम /Old Age Home आखिरी उपाय हैं ...

किन्तु ....

अब मेरी धारणा बदल रही है ...

अब मुझे लगता है ...

" वृद्धाश्रम इंसान की प्राथमिक ( primary ) आवश्यकता है।

आप ख़ुद बच्चों के साथ सामंजस्य न बैठा पा रहे हों तो ...

बच्चे आपके साथ एडजस्ट न करना चाहते हों तो ...

वृद्धाश्रम को अपनाने में कोई हर्ज़ नहीं।

इसमें कोई शर्मिन्दगी अभिभावकों नहीं होनी चाहिए। 

बच्चों ने आपके साथ रहना नहीं स्वीकार किया तो , अथवा अपनी personal space के लिए उन्होंने अपने घर से आपको निकाल दिया तो , अथवा 

झूठ बोल कर आपको बिना बताये आपके घर को छोड़ कर चले गये तो ....

बजाय दुखी होने के और घोर डिप्रेशन में चले जाने के , और 

अनहोनी को निमंत्रण देने के ...

वृद्धाश्रम को अपनाया ही जाना चाहिए।

NGO , धर्मार्थ कार्य करने वाली संस्थाओं और स्वयं सरकार को वृद्धाश्रम बनवाने और उनका उचित प्रबन्धन किया जाना चाहिए।

आप भी यदि किसी वृद्धाश्रम के बारे में जानते हों तो उसका नाम,पता ,शहर/गाँव एवं उसका शुल्क / Fees के बारे में comment में लिख सकते हैं और उन सभी अनजान ,संकोची व डिप्रेशन से जूझ रहे इंसानों की बिना पूछे मदद कर सकते हैं। हो सकता है आपके द्वारा दी गयी जानकारी को वे चुपचाप ले लें जो उनके बहुत काम आये।

एक हाथ बढ़ा कर देखिये ....

Tuesday, 1 June 2021

बड़ा मंगल

 


संकट कटै मिटै सब पीरा।

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।


अवध में ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगलवार को बड़ा मंगल कहा जाता है जिसमें हनुमान जी का विशेष पूजन-अर्चन होता है। जगह-जगह भण्डारे होते हैं।


इतिहासकारों के अनुसार बड़े मंगल को मनाए जाने का इतिहास लगभग 400 वर्ष पुराना है। 


बड़े मंगल के साथ लखनऊ के अलीगंज में स्थित हनुमान जी का मंदिर जुड़ा हुआ है। यह सबसे प्राचीन मंदिर है और इसकी बड़ी मान्यता है।



बताते हैं कि सन् 1798 में अवध के नवाब थे सहादत अली खान। संतान की लालसा पूरी नहीं हुई थी। उनकी माँ आलिया बेगम ने मन्नत माँगी। नवाब की बेगम ने पुत्र को जन्म दिया। आलिया बेगम की मुराद पूरी हुई। आलिया बेगम को ख़्वाब में हनुमान जी के दर्शन हुए।उन्होंने बेगम साहिबा को निशान लगे स्थान पर खुदाई करवा कर अपनी मूर्ति निकलवाने का आदेश दिया। बेगम साहिबा ने खुदाई प्रारम्भ करवाई। जनता उनका मजाक उड़ाने लगी। बेगम साहिबा विचलित हुए बिना हनुमान जी से उस स्थल को दिखाने की प्रार्थना करने लगीं।


उन्होंने हनुमान जी से विनती की कि, “ आपके आदेश पर जमीन की खुदाई प्रारम्भ करवाई है। कृपया अपना दर्शन दें। ” हनुमान जी मूर्ति ने दर्शन दिया। जनता जय हनुमान के नारे लगाने लगी। 


आलिया बेगम ने हाथी मंगवा कर उसकी पीठ पर हनुमान जी की मूर्ति को स्थापित किया और उसे आजाद करवा कर कारिंदों को आदेश दिया कि, “ हाथी के पीछे जाओ। जहाँ भी जा कर हाथी अपने आप रूक जाए बस  ठीक वहीं हनुमान जी का मन्दिर बनना प्रारम्भ किया जाए। हनुमान जी स्वयं अपने मन्दिर की स्थापना की जगह तय करेंगें। ” हाथी अलीगंज में जा कर रुक गया। हनुमान जी ने अपना स्थल चुन लिया था।आलिया बेगम ने वहीं पर हनुमान जी के मन्दिर का निर्माण करवाकर मूर्ति की स्थापना की। मन्दिर के गुम्बद पर एक सितारा और एक अर्धचंद्र बनाया गया जो हिन्दू मुस्लिम एकता व भाईचारे को दर्शाता है।



अवध के आख़िरी नवाब वाज़िद अली शाह ने मंदिर में पूजा अर्चना और भोज-भण्डारे की परंपरा को सजीव रखा।


एक कथा और प्रचलित है। अवध के नवाब हुए मोहम्मद अली शाह। उनके पुत्र की तबियत खराब थी जो दिनों दिन बिगड़ती ही जा रही थी। किसी भी हक़ीम वैद्य का इलाज़ माफ़िक ही नहीं आ रहा था। ऐसे में किसी ने बालक को अलीगंज स्थित हनुमान जी के मंदिर में दर्शन करवाने ले जाने का सुझाव दिया। नवाब और उनकी बेगम रुबिया बच्चे को मन्दिर ले गए। मन्दिर के पुजारी ने उनसे राजकुमार को मन्दिर में छोड़कर जाने के लिए कहा और कुछ दिन बाद का समय दिया पुनः आकर पुत्र को ले जाने का आदेश दिया। नियत समय पर नवाब और बेगम अपने पुत्र को लेने पहुँचे। अपने स्वस्थ पुत्र को देखकर वे हनुमान जी के चमत्कार के आगे नतमस्तक हुए। नवाब साहब ने मन्दिर के सौंदर्यीकरण के लिए अनेक कार्य करवाये और  ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगल पर बड़ा मंगल मनाए जाने की घोषणा की। हनुमान जी की सम्पूर्ण विधि विधान से पूजा हुई। भण्डारा हुआ। उसी समय से बड़ा मंगल पर्व मनाया जाने लगा।


तब से आज तक ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगल को बड़ा मंगल मनाया जाता है। बहुत बड़ा मेला लगता है। सम्पूर्ण शहर में भण्डारे होते हैं। जगह-जगह प्याऊ लगाए जाते हैं जिसमें पानी और शर्बत श्रद्धालुओं को पिलाया जाता है।



Sunday, 23 May 2021

नमस्कार


 कुछ स्त्रियाँ एक नदी के तट पर बैठी थी। वे सभी धनवान व सुंदर भी थीं।  वे नदी के शीतल एवं स्वच्छ जल में अपने हाथ - पैर धो रही थीं और पानी में अपनी परछाई देखकर अपने सौंदर्य पर स्वयं ही मुग्ध हो रही थीं।

तभी उनमें से एक ने अपने हाथों की प्रशंसा करते हुए कहा, “ देखो, मेरे हाथ कितने सुंदर है।” दूसरी स्त्री ने दावा किया कि उसके हाथ ज्यादा खूबसूरत हैं तीसरी स्त्री ने भी यही दावा दोहराया।

उनमें इस पर बहस छिड़ गई तभी एक बुजुर्ग स्त्री लाठी टेकती हुई वहाँ से निकली। उसके कपड़े मैले- कुचैले थे वह देखने से ही अत्यंत निर्धन लग रही थी।

उन स्त्रियों ने उसे देखते ही कहा, “ बहस छोड़ कर चलो इस बुढ़िया से पूछते हैं कि हममें से किसके हाथ सबसे अधिक सुंदर हैं।”

उन्होंने बुजुर्ग महिला को पुकारा, “ ओ बुढ़िया, जरा इधर आकर ये तो बता कि हममें से किसके हाथ सबसे अधिक सुंदर हैं।”

बुजुर्ग किसी तरह लाठी टेकती हुई उनके पास पहुंची और बोली, “ मैं बहुत भूखी हूँ। पहले मुझे कुछ खाने को दो, कुछ पेट में जाये तभी कुछ बता सकूँगी।” ”

वे घमण्डी स्त्रियाँ हँस पड़ी और बोलीं, “ जा भाग, हमारे पास कोई खाना-वाना नहीं है। ये भला हमारी सुंदरता को क्या पहचानेगी।”

वहीं थोड़ी ही दूरी पर एक मजदूर महिला बैठी थी वह देखने में सामान्य लेकिन मेहनती और विनम्र थी। उसने बुजुर्ग को अपने पास बुलाकर प्रेम से बैठाया और अपनी पोटली खोलकर अपने खाने में से आधा खाना उसे दे दिया फिर नदी से लाकर ठंडा पानी पिलाया। उस मजदूर महिला ने उसके हाथ-पैर धोए और अपनी फटी धोती से पोंछकर साफ कर दिए इससे बुजुर्ग महिला को बड़ा आराम मिला।

जाते समय वह बुजुर्ग उन सुंदर महिलाओं के पास जाकर बोली , “ सुंदर हाथ उन्हीं के होते हैं जो अच्छे कर्म करें तथा जरूरतमंदों की सेवा करें। अच्छे कार्यों से हाथों का सौंदर्य बढ़ता है, आभूषणों से नहीं।”

गरीब और असहाय लोगो की हमेशा मदद करनी चाहिए जिससे आपके कर्मों की सुंदरता निखरती चली जाए।

सुबह की चाय,
साथ हो अख़बार,
एक सुविचार, 
चिंतन मनन का अधिकार ...
सब है तो 
हमारे - आपके पास।

Bohra Sisters की शानदार प्रस्तुति वाले Doodle के साथ सुबह की 
नमस्कार
   🙏🏻


Friday, 21 May 2021

कोरोना तेरे आफ्टर इफेक्ट

समाजसेवी युवा लोगों का एक ग्रुप वैन द्वारा खाद्य सामग्री बांट रहा था।

भीड़ वैन को घेरे हुई थी। 

दूर से एक खिड़की का पर्दा जरा सा खिसकाए एक स्त्री झिर्री में से झांक रही थी। वह इन्टर कॉलेज की अध्यापिका थीं जो वेतन न मिलने के कारण आर्थिक रूप से परेशान थीं, किन्तु अपनी परेशानी किसी से बता भी नहीं पा रही थीं। बीमार पति और दो छोटे बच्चों व बूढ़े सास ससुर के पालन-पोषण व इलाज की जिम्मेदारी में संचित धन खत्म होने को आ गया था।

एक युवक की नजर उन पर पड़ी और उसने अपने पास खड़े दो युवकों को धीरे से वह दिखाया।

युवक-युवतियों ने आपस में निर्णय किया और वैन पर लगे “ मुफ्त सहायता ” वाले बैनर को उतारा और पलट कर उसी कपड़े पर लिखा, 

“ आलू, प्याज, टमाटर, तरोई, लौकी, कद्दू, अमरूद का आज का भाव : मात्र 7 रुपये किलो।

आटा, अरहर दाल, चावल का आज का भाव : 10 रुपये किलो।

तेल : 11 रुपये लीटर केवल आज 

नमक 1 किलो, मिर्च पाउडर 100 gm , हल्दी पाउडर 100 gm आज मात्र  7 रुपये में।

शक्कर एक किलो : 10 रुपये

चाय की पत्ती:  मात्र 9 रुपये की 900 gm ”


दस पंद्रह मिनट में भीड़ के बीच झिर्री वाली आंखों वाली महिला सिर झुकाए, तनाव से भरी हुई आई और सब्जी, अनाज, तेल खरीद ले गयी।

जाते समय उसके मुँह पर संतोष का भाव था।


युवकों ने उससे प्राप्त रुपये दान पेटी में डाल दिये और बैनर उल्टा करके टांग दिया 

“ मुफ्त सहायता ”

Wednesday, 19 May 2021

मध्यम वर्ग और कोरोना

कोरोना को भारत में आये करीब डेढ़ साल होने को आये। स्वास्थ्य ही नहीं उसने तो जीवन के हर क्षेत्र को अपने कंट्रोल में ले लिया है। हर तरफ हाहाकार है, कोहराम है। किल्लत में बिना किसी की सहायता के नहीं चलता फिर ये तो किल्लत की सिरमौर समस्या है जिसमें हर तरीके की दुश्वारियाँ हैं।

किसी की सहायता करने से अक्सर इच्छा होते हुए भी इंसान पीछे हट जाता है क्योंकि उन्हें पता होता है कि उस कार्य में धन लगता है। 

हर कोई धनाढ्य नहीं होता और अगर है भी तो परोपकार की भावना से युक्त नहीं होता।

और आख़िरी सबसे महत्वपूर्ण बात जिसे अंडरलाइन में देखिएगा कि लगभग सभी ने या आधे लोगों ने नोटबन्दी के समय से अपने संचित धन में लगातार कमी होती ही देखी है। पहले लॉक डाउन के समय से तो लाल रेखा ग्राफ पर तेजी से पाताल लोक से गले मिलने दौड़ी जा रही है।

मैं निजी तौर पर इस समय ऐसे कई परिवारों को जानती हूँ जिनकी आमदनी शून्य हो चुकी है और संचित धन चंद दिनों का मेहमान है।

मध्यम वर्ग की सबसे बड़ी समस्या मानसिक होती है कि न तो वे स्वयं को निम्न आयवर्ग में रखकर तदनुसार आचरण कर पाते हैं कि मुफ्त मिलने वाला सरकारी राशन ही आगे बढ़कर सहायता वैन से ले पायें, 

और ...

न ही इतनी हिम्मत होती है कि बैंक में खुद को गरीब घोषित कर प्रधानमंत्री सहायता और मुख्यमंत्री सहायता ही पा कर कम से कम बुखार की पैरासिटामोल ही खरीद पायें। 

ये बस धनाढ्य वर्ग कार्बन कॉपी बनने और नकली शो बाजी वाली  ज़िन्दगी जीने के फेर में अपनी ज़िंदगी दुश्वारियों से भर देते हैं।

साथ पुरवाने को होते हैं कुछ एक्सकलमेटरी शब्द और नीचा दिखाती नज़रें। अगर सिंहासन से उतरना भी चाहें तो दूसरे उनके पैर के नीचे की जमीन खींच लेने को तैयार बैठे होते हैं।

अब ऐसे में किसी दूसरे की सहायता भला कौन करेगा जबकि वह अपनी ही सहायता नहीं कर पा रहा।


The Legend: Sachin Tendulkar

Over the years, Tendulkar has forged his name in history as the ‘The Greatest Batter of all time’ and he also got nicknamed as The ‘Master B...