हम किसी के भी द्वारा की गई सहायता को,( भले ही यह उसके कार्य का/उसकी नौकरी का ही हिस्सा क्यों न हो) बड़ी आसानी से उपेक्षित कर देते हैं।
एक छोटा सा आभार प्रदर्शन , भले ही वह ऊपरी मन से किया गया हो, किसी भी सहायक का उत्साह निश्चित रूप से बढ़ा देता है।
हम यहाँ संकीर्ण मानसिकता से काम लेते हैं और सहायकों द्वारा किये कार्य के पीछे के भाव को महसूस करने की जरूरत ही नहीं समझते।
लॉक डाउन का समय अचानक आया था। बीमारी भी एकदम नई थी। इलाज मौजूद नहीं है यह बात भी स्पष्ट थी। बीमार होते ही अस्पताल में अकेले रहना है और सकुशल घर पहुँचेंगें यह भी गारण्टी नहीं थी। मृत्यु होने की दशा में लावारिस की तरह का क्रियाकर्म ही होना था।
ऐसे समय में दवाई, राशन, सब्जी, दूध आदि की डिलीवरी को सुचारू रूप से संभाले रखा डिलीवरी बॉयज ने। दवाइयाँ अविलंब पहुँचाने का प्रणाम करने योग्य कार्य किया दवाई विक्रेता ने। हम अपने घरों में सुरक्षित रह सके पुलिस कर्मियों के अथक प्रयास के कारण।
ठीक इसी प्रकार से हम लोग बिजली के सुचारू रूप से आते रहने, पानी की लगातार सप्लाई, गैस सिलेंडर का त्वरित गति से घर पर डिलीवरी होना हमारी बहुत बड़ी समस्या से हमें बचा गया।
जो लोग सोसायटी में रहते हैं उन्होंने स्वयं अनुभव किया होगा कि उनकी सोसायटी के गार्ड, मेंटिनेंस स्टाफ लगातार निःस्वार्थ भाव से पूर्ण विनम्रता के साथ पूरे लॉक डाउन सोसायटी में उपस्थित रह कर बिजली, पानी, सफाई और मेन गेट की व्यवस्था से लेकर हर ब्लॉक में सीनियर सिटीजन की सहायता करना, सीनियर सिटीजन के घर की राशन सब्जी आदि की डिलीवरी को बिना किसी ना-नुकुर के उनके घर पहुँचाता रहा।
क्या इन सभी को अपनी जान की फ़िक्र नहीं थी ❓
क्या हम उन्हें उनकी सैलरी के अतिरिक्त कोई पेमेंट कर रहे थे ❓
क्या इतना सारा कार्य उनके सेवा अनुबंध का हिस्सा था ❓
एक बार सोचिएगा जरूर कि ...
★ असली अभिनंदन हमें किसका करना चाहिए
★ हमें सबसे पहला धन्यवाद किसे देना चाहिए
आपको एक प्रश्न स्वयं से अवश्य करना चाहिए कि ....
क्या हमने इन्हीं सेवाकर्मियों के समान किसी की कोई सहायता की ❓
अगर आपको उत्तर न मिले तो ...
एक बार सच्चे दिल से इन सभी सेवाकार्यों को करने वाले कर्मियों का आभार अवश्य प्रकट कीजियेगा।















