जिनके क़िरदार से आती हो सदाक़त की महक,
उनकी तदरीस से पत्थर भी पिघल सकते हैं।
गुरू वह जो आपके क्षणांश को भी उत्कृष्टता की ओर जाने को प्रेरित ही न करे बल्कि आपको उसे लक्ष्य बना कर हासिल करना सिखाये।
प्रथम गुरु माता और द्वितीय गुरु पिता जो हमें इस लायक बनाते हैं कि हम दुनिया के सामने प्रस्तुत हो सकें।
हमारी पहली तख़्ती/सुलेख-पुस्तिका पर पहली डंडी खिंचवाने वाले हमारी पाठशाला के वह शिक्षक जिनका बहुधा हम नाम भी भूल गए होते हैं।
हमारी समस्त शैक्षिक यात्रा में हमारे बेहतरीन गुणों को तराशने और सँवारने वाले शिक्षकों का योगदान उनका आजीवन ऋणि बने रहने के लिए भी कम है।
हमारी जीवन यात्रा में बाह्य संसार के अनजान और पहचाने इंसान जो जीवन की ऐसी दुर्लभ और अमूल्य शिक्षा हमारे दैनिक आचार-व्यवहार पर जाने-अनजाने दे जाते हैं।
इन सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस पर वन्दन , नमन , सादर प्रणाम !!


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