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Thursday, 29 October 2020

कचौड़ी मनपसंद

 



कचौड़ी एक पारंपरिक व्यंजन है जो आम भारतीय रसोई में शृंगार सहित भोजन थाल में विराजमान होकर भोजन की मेज या चौकी तक आती है। मूलतः कचौड़ी का उदगम स्थल उत्तर प्रदेश को माना जाता है। राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में बिना कचौड़ी भोजन अधूरा समझा जाता है।

कचौड़ी को सुबह के नाश्ते, दोपहर के भोजन, शाम की चाय के साथ और रात्रिभोज कभी भी शामिल किया जाता है।

कचौड़ी को मूलतः मोयन वाले आटे में दाल, बेसन, आलू, प्याज, मटर आदि भर कर बनाया जाता है। राजस्थान की प्याज की कचौड़ी का कोई सानी नहीं है। कोटा कचौरी में उड़द की दाल जो हींग से छौंकी जाती है उसका स्वाद बेजोड़ और जग प्रसिद्ध है। जोधपुर की मावा कचौरी तो बस वाह ही होती है।

गुजरात में मूंग की दाल अदरक के साथ लाल और काली मिर्च दोनों का प्रयोग होता है।

बंगाल की क्लब कचौड़ी का भी विशिष्ट स्वाद है। बंगाल की प्रसिद्ध राधावल्लभी अद्वितीय होती है। अधिकांशतः बंगाल की कचौड़ी मैदे दे बनती है और मुलायम होती हैं।

दिल्ली में कचौड़ी चाट में सर्व होती है जो खस्ता कचौड़ी या राज कचौरी कहलाती है।

उत्तर प्रदेश में सुबह नाश्ते में खस्ता और आलू का चलन है जिसके साथ जलेबी भी खाई जाती है। दोपहर से शाम तक कचौड़ी के साथ छोले, सफेद मटर-आलू , मट्ठे वाले रसेदार आलू , रसेदार सादे आलू और काला चना भी खाया जाता है।



आलू की कचौड़ी के भी बहुत सारे दीवाने होते हैं जो दो तरीके से बनती है - एक सादी और दूसरी प्याज सहित।

कचौड़ी बनाते समय ध्यान रखने की बात आटे का मोयन सही अनुपात में हो और वह गूँधा बहुत रच कर जाये तभी कचौड़ी खस्ता बनेगी। यदि बिना मोयन के आटा गूँधा जा रहा हो दैनिक भोजन के लिए तो आटे को गूँधते समय ध्यान रखना होता है कि न वो नर्म हो और न ही एकदम सख़्त।

आइये सादे आलू की दैनिक बनाई जाने वाली कचौड़ी बनायें।

सामग्री :-

आलू     -  2 मध्यम आकार के , उबालकर कद्दूकस किये हुए

जीरा     - 1/6 tsp

हींग      - आधा चुटकी 

हल्दी    - 1/6 tsp

लाल मिर्च - 1/4 tsp

गरम मसाला - 1/4 tsp

नमक           - स्वादानुसार

अमचुर         - स्वादानुसार - optional

हरी धनिया   - 1/4 tsp , बारीक कटी 

हरी मिर्च       - 1 छोटी, बारीक कटी हुई 

अदरक         - 1/4 tsp कद्दूकस की हुई 

रिफाइंड ऑयल - 1 tsp

आटा               - 1 कप 

सूजी               - 1 tbsp - optional

रिफाइंड ऑयल - 1 tbsp

नमक                - स्वादानुसार 

Step I 

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आटा , सूजी, नमक अच्छी तरह मिला लें।

मोयन डालें और देखें कि आटे की मुट्ठी बंध रही हो।

गुनगुने पानी की सहायता से आटा गूँध लें और ढ़ककर रख दें। 

हाँ, आटे के ऊपर हल्की सी पर्त तेल की लगाना नहीं भूलिएगा।

Step II

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तेल पैन में गर्म करके जीरा और हींग डालें।

हल्दी, हरी मिर्च और अदरक डालें और कुछ सेकेंड चलायेँ।

लाल मिर्च डालें और आलू डालकर चला लें।  

इस पर अमचुर व गरम मसाला तथा नमक मिलाकर दो मिनट तक भूनें।

गैस बन्द करें और हरी धनिया मिला लीजिए।


Step III

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कढ़ाही में कचौड़ी तलने के लिए रिफाइंड ऑयल रखिये।

अब कचौड़ी भरिये।



कचौड़ी को बिना बेले भी बनाया जा सकता है।


बस भरते समय ऊँगली और अँगूठे की सहायता से सूखा आटा अवश्य हल्का सा भीतर लगा लीजिये जिससे भरावन अच्छी तरह एक समान फैले।

साइज भी कचौड़ी का अपनी पसंद के अनुसार रखा जा सकता है।

आप चाहें तो बेल कर भी कचौड़ी तैयार कर सकती हैं।


अब आँच धीमी रखकर गरम तेल में कचौड़ी तल लें।



पेपर टॉवल पर कचौड़ी निकाल लें जिससे अतिरिक्त तेल पेपर टॉवल सोख ले।

हरी चटनी, सोंठ की इमली वाली चटनी, रसेदार आलू, सूखे खड़े मसाले वाले आलू के साथ परोसिये।

खुद भी खाइये और सबको खिलाइए।

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