सदियों से चली आ रही है वह प्रथा जिसमें पुरुषों का घर में सहयोग बच्चों, स्त्रियों की रक्षा व आर्थिक सहयोग अघोषित नियम के तहत स्थापित है। आर्थिक सहयोग के बिना घर गृहस्थी का संचालन असम्भव होता है। घर के हर कोने-अतरे का विभाजन अघोषित रूप से कर लिया गया था जिसके परिणामस्वरूप स्त्रियाँ घर की चौहद्दी के भीतर अदृश्य लक्ष्मण रेखा के भीतर रहती चली आईं। रसोई, वस्त्रों की धुलाई, घर की साफ-सफाई आदि कार्य आये स्त्रियों के जिम्मे और पुरुषों के लिए बने वर्जित क्षेत्र।
इसी वर्जित क्षेत्र में सेंध लगा दी हमारे आम घरों के पुरूषों ने। लॉक डाउन के दौरान पुरूषों का एक बहुत बड़ा वर्ग सफलतापूर्वक इन वर्जित क्षेत्रों में न केवल अपनी उपस्थिति महसूस करवा सका बल्कि अपने कौशल को यहाँ भी स्थापित कर पाया।
घर की सफाई , साज सज्जा से लेकर दिल में उतरने की कला के रास्तों की खुद से पहचान करवाई और कठिन परिश्रम से विभिन्न व्यंजनों के स्वाद को हवा में दूर-दूर तक फैला दिया।
कई पुरुषों ने अपनी माँ और दादी-नानी की रेसिपी को साधा। कुछ ने यूट्यूब का सहारा लिया, कुछ ने विभिन्न रेसिपी एप्प डाउनलोड करके जायके के सफर को हमसफ़र बनाया।
फेसबुक , ट्विटर, इंस्टाग्राम पर पुरुषों ने अपनी पाककला की मजबूत दावेदारी पेश की। आज उनकी जबरदस्त फैन फॉलोइंग है।
चित्र मिल्क पाउडर से बने मथुरा पेड़े का है।
फेसबुक पर मुकेश कुमार सिन्हा जहाँ एक तरफ कलम के धनी हैं वहीं दूसरी ओर उनकी पाककला अपना परचम लहरा रही है। पाककला के शौकीन तो वे कोरोनो काल से पहले ही रहे हैं किंतु लॉक डाउन के दौरान उनका परंपरागत मिठाइयों अच्छे-अच्छे हलवाई को भी शर्मिंदा कर दे।
रश्मि रविजा के पुत्र कमाल की डिश बनाते हैं जिसे रश्मि अक्सर अपने पटल पर साझा करती हैं। उनके व्यंजनों की प्रस्तुति बहुधा एक्सपर्ट शेफ सरीखी होती हैं।
संध्या जैन के पुत्र अक्सर नई-नई डिश बनाते हैं। संध्या का उल्लास झलकता है उन व्यंजनों की कहानी फेसबुक पर सुनाते हुए।
मेरा अपना बेटा बेकिंग एक्सपर्ट हुआ जा रहा है। नए-नए प्रयोग उसे भाते हैं। सामग्री को अदल बदल करना, उनकी माप तौल को घटा-बढ़ा कर उसे बेहतरीन स्वाद को ला कर ही उसे संतुष्टि मिलती है।
चित्र मेरे बेटे के बनाये पहले केक का है।
बीन्स और आलू : प्रथम प्रयास
स्त्रियों के साम्राज्य वाले पुरुषों के लिए वर्जित क्षेत्र में सेंध तो लग ही गयी और बहुत खूब लगी ☺️










नीता जी, बहुत बधाई आपको ये विषय अभी प्रारंभिक स्तर पर ही है लेकिन आपकी पारखी दृष्टि इस विषय पर जल्दी पड़ गई जो कि आने वाले सामय में समाज को वियापक रूप से प्रभावित करेगा।
ReplyDeleteशुक्रिया
Deleteहार्दिक आभार
ReplyDeleteशुक्रिया
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