कुछ स्त्रियाँ एक नदी के तट पर बैठी थी। वे सभी धनवान व सुंदर भी थीं। वे नदी के शीतल एवं स्वच्छ जल में अपने हाथ - पैर धो रही थीं और पानी में अपनी परछाई देखकर अपने सौंदर्य पर स्वयं ही मुग्ध हो रही थीं।
तभी उनमें से एक ने अपने हाथों की प्रशंसा करते हुए कहा, “ देखो, मेरे हाथ कितने सुंदर है।” दूसरी स्त्री ने दावा किया कि उसके हाथ ज्यादा खूबसूरत हैं तीसरी स्त्री ने भी यही दावा दोहराया।
उनमें इस पर बहस छिड़ गई तभी एक बुजुर्ग स्त्री लाठी टेकती हुई वहाँ से निकली। उसके कपड़े मैले- कुचैले थे वह देखने से ही अत्यंत निर्धन लग रही थी।
उन स्त्रियों ने उसे देखते ही कहा, “ बहस छोड़ कर चलो इस बुढ़िया से पूछते हैं कि हममें से किसके हाथ सबसे अधिक सुंदर हैं।”
उन्होंने बुजुर्ग महिला को पुकारा, “ ओ बुढ़िया, जरा इधर आकर ये तो बता कि हममें से किसके हाथ सबसे अधिक सुंदर हैं।”
बुजुर्ग किसी तरह लाठी टेकती हुई उनके पास पहुंची और बोली, “ मैं बहुत भूखी हूँ। पहले मुझे कुछ खाने को दो, कुछ पेट में जाये तभी कुछ बता सकूँगी।” ”
वे घमण्डी स्त्रियाँ हँस पड़ी और बोलीं, “ जा भाग, हमारे पास कोई खाना-वाना नहीं है। ये भला हमारी सुंदरता को क्या पहचानेगी।”
वहीं थोड़ी ही दूरी पर एक मजदूर महिला बैठी थी वह देखने में सामान्य लेकिन मेहनती और विनम्र थी। उसने बुजुर्ग को अपने पास बुलाकर प्रेम से बैठाया और अपनी पोटली खोलकर अपने खाने में से आधा खाना उसे दे दिया फिर नदी से लाकर ठंडा पानी पिलाया। उस मजदूर महिला ने उसके हाथ-पैर धोए और अपनी फटी धोती से पोंछकर साफ कर दिए इससे बुजुर्ग महिला को बड़ा आराम मिला।
जाते समय वह बुजुर्ग उन सुंदर महिलाओं के पास जाकर बोली , “ सुंदर हाथ उन्हीं के होते हैं जो अच्छे कर्म करें तथा जरूरतमंदों की सेवा करें। अच्छे कार्यों से हाथों का सौंदर्य बढ़ता है, आभूषणों से नहीं।”
गरीब और असहाय लोगो की हमेशा मदद करनी चाहिए जिससे आपके कर्मों की सुंदरता निखरती चली जाए।
सुबह की चाय,
साथ हो अख़बार,
एक सुविचार,
चिंतन मनन का अधिकार ...
सब है तो
हमारे - आपके पास।
Bohra Sisters की शानदार प्रस्तुति वाले Doodle के साथ सुबह की
नमस्कार
🙏🏻
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