समाजसेवी युवा लोगों का एक ग्रुप वैन द्वारा खाद्य सामग्री बांट रहा था।
भीड़ वैन को घेरे हुई थी।
दूर से एक खिड़की का पर्दा जरा सा खिसकाए एक स्त्री झिर्री में से झांक रही थी। वह इन्टर कॉलेज की अध्यापिका थीं जो वेतन न मिलने के कारण आर्थिक रूप से परेशान थीं, किन्तु अपनी परेशानी किसी से बता भी नहीं पा रही थीं। बीमार पति और दो छोटे बच्चों व बूढ़े सास ससुर के पालन-पोषण व इलाज की जिम्मेदारी में संचित धन खत्म होने को आ गया था।
एक युवक की नजर उन पर पड़ी और उसने अपने पास खड़े दो युवकों को धीरे से वह दिखाया।
युवक-युवतियों ने आपस में निर्णय किया और वैन पर लगे “ मुफ्त सहायता ” वाले बैनर को उतारा और पलट कर उसी कपड़े पर लिखा,
“ आलू, प्याज, टमाटर, तरोई, लौकी, कद्दू, अमरूद का आज का भाव : मात्र 7 रुपये किलो।
आटा, अरहर दाल, चावल का आज का भाव : 10 रुपये किलो।
तेल : 11 रुपये लीटर केवल आज
नमक 1 किलो, मिर्च पाउडर 100 gm , हल्दी पाउडर 100 gm आज मात्र 7 रुपये में।
शक्कर एक किलो : 10 रुपये
चाय की पत्ती: मात्र 9 रुपये की 900 gm ”
दस पंद्रह मिनट में भीड़ के बीच झिर्री वाली आंखों वाली महिला सिर झुकाए, तनाव से भरी हुई आई और सब्जी, अनाज, तेल खरीद ले गयी।
जाते समय उसके मुँह पर संतोष का भाव था।
युवकों ने उससे प्राप्त रुपये दान पेटी में डाल दिये और बैनर उल्टा करके टांग दिया
“ मुफ्त सहायता ”
मार्मिक कहानी जो आज की वास्तविकता को लपेटे हुए है।
ReplyDeleteशुक्रिया
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